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CBSE Scam: Chairman and Secretary Removed
कोलकाता: CBSE Scam: Chairman and Secretary Removed, पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित किए गए दो बागी विधायकों ने ममता बनर्जी की सरकार और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। निष्कासित विधायकों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया है कि वे ही "असली तृणमूल कांग्रेस" हैं और पार्टी के आधे से ज्यादा विधायक उनके संपर्क में हैं।
इस बड़े सियासी घटनाक्रम के बाद बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) और बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिससे राज्य में नए सियासी समीकरणों की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
"हमारे पास 50 से ज्यादा विधायकों का समर्थन"
पार्टी से निकाले जाने के तुरंत बाद दोनों बागी विधायकों ने आक्रामक रुख अपना लिया है। उन्होंने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती देते हुए कहा:
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असली TMC होने का दावा: विधायकों का कहना है कि पार्टी की मूल विचारधारा से मौजूदा नेतृत्व भटक चुका है, इसलिए वे ही असली तृणमूल का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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ममता सरकार पर संकट?: उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में 50 से अधिक TMC विधायक उनके साथ खड़े हैं और वे सही समय पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे। अगर यह दावा सच साबित होता है, तो बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा संकट हो सकता है।
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी का हमला
इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहे विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा तंज कसा है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा:
"यह तो होना ही था। टीएमसी कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन चुकी है, जहां विधायकों और मंत्रियों की कोई इज्जत नहीं है। पार्टी के भीतर असंतोष का ज्वालामुखी फूट चुका है। यह सिर्फ दो विधायकों की बात नहीं है, बहुत जल्द पूरी की पूरी टीएमसी ताश के पत्तों की तरह ढहने वाली है। बंगाल की जनता इस भ्रष्ट सरकार से मुक्ति चाहती है।"
क्या है विवाद की जड़?
सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर टिकट बंटवारे, अंदरूनी गुटबाजी और शीर्ष नेतृत्व के फैसलों को लेकर इन विधायकों की अनबन चल रही थी। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाकर टीएमसी नेतृत्व ने इन दोनों विधायकों को निष्कासित कर दिया था। लेकिन निष्कासन के बाद शांत बैठने के बजाय, इन विधायकों ने सीधे तौर पर 'असली और नकली' की जंग छेड़ दी है, जिसने महाराष्ट्र के शिवसेना और एनसीपी विवाद की यादें ताजा कर दी हैं।
आगे क्या होगा?
इस बगावत के बाद बंगाल की राजनीति में कानूनी और तकनीकी लड़ाई (जैसे दलबदल कानून) शुरू होना तय माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या बागी विधायक अपने साथ 50 विधायकों को सार्वजनिक रूप से सामने ला पाते हैं या टीएमसी इस डैमेज को कंट्रोल करने में कामयाब होती है।